जोधपुर के दर्शनीय स्थल 2025
- मेहरान गढ़ किला
- जसवंत थड़ा
- उम्मेद भवन पैलेस
- घंटा घर
- मंडोर उद्यान
- महामंदिर
- कायलाना झील
- राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क
- माचिया सफारी पार्क
- तूर जी का झालरा
- बालसमंद झील
मेहरान गढ़ किला
Fort Rd, Jodhpur 342006
इतिहास :- पर्यटकों के लिए जोधपुर ऐतिहासिक धरोहर का आकर्षण केंद्र बन गया है जो इसके यहाँ के हेरिटेज स्मारकों से नज़र आता है और उनमें से एक स्मारक मेहरानगढ़ किला हैं |
मेहरानगढ़ किला 122 मीटर (400 फीट ) ऊँची पहाड़ी के ऊपर समतल भाग पर स्थित है और इस किले का परिसर 1200 एकड़ (486 हेक्टेयर) में फैला हुआ है | यह राजस्थान के विशाल किलों में से एक है |
मेहरानगढ़ किला मूलतः लगभग 1459 में राव जोधा द्वारा बनाया गया था जो राजा रणमल के पुत्र थे | हालाँकि इस किले का ज्यादातर भाग का निर्माण 17 वीं सदी में राव जोधा के उत्तराधिकारियों द्वारा करवाया गया | पहले राजा मंडोर के शासक थे फिर उन्होंने अपनी राजधानी को जोधपुर स्थानांतरित किया और वहा से शासन सुचारू किया |
मेहरानगढ़ किला अपने भव्य संरचना के लिए प्रसिद्ध है | मेहरानगढ़ से बाद में बहुत से शासको ने अपने राज्य पर शासन किया जिनमें महाराजा तख़्त सिंह , महाराजा अजित सिंह , महाराजा हनवंत सिंह , महाराजा मालदेव आदि |
सामान्य जानकारी : -
मेहरानगढ़ किले में प्रवेश के लिए कोई टिकट की आवश्यकता नहीं है परन्तु इस किले में स्थित महत्वपूर्ण जगहों जैसे महल, संग्रहालय आदि को देखनें के लिए आपको टिकट खरीदनी होगी जो आपको किले के उत्तरपूर्व दिशा में स्थित मुख्य प्रवेश द्वार जयपोल पर बने टिकट काउंटर पर मिलेगी जिसके शुल्क की जानकारी अंत में नीचे दी गयी है | दक्षिण-पश्चिम दिशा में किले का एक अन्य द्वार भी है जिसका नाम फ़तेह पोल है , इस मार्ग का उपयोग कम लिया जाता है | ऊपर से जोधपुर का सबसे अच्छा दृश्य देखने के लिए हम फ़तेह पोल जाने की सलाह देते हैं क्योंकि यह पुराने शहर के नवचोकिया मोहल्ले के करीब है, जहां अधिकांश घरों पर नीला रंग किया हुआ है इस कारण यहाँ से शहर नीला दिखाई देता है |
- प्रमुख आकर्षण :-
- चामुंडा माता मंदिर :- यह मंदिर किले पर ही स्थित है , इस मंदिर को 'नागणेची माँ मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है | मंदिर में दशहरा पर्व पर बड़ा भव्य उत्सव मनाया जाता है, जिसमें भारी भीड़ उमड़ती है। माँ चामुंडा राठौड़ राज परिवार की ईष्ट देवी है |
- संग्रहालय :- यह संग्रहालय किले में ही स्थित है |. किले के महलों को ही संग्रहालय का रूप दिया गया है , टिकट काउंटर से टिकट लेकर इसमें प्रवेश लिया जा सकता है | इसमें कुछ बेहतरीन महल हैं और इस संग्रहालय में भारतीय दरबारी जीवन के कई अमूल्य अवशेष संरक्षित हैं जिनमें लघु चित्रकारी, वस्त्र और साज-सज्जा, पालकी, हाथी की सीटें और अस्त्र-शस्त्र शामिल हैं।
- मोती महल:- मोती महल के नाम से मशहूर मोती महल, मेहरानगढ़ किले के सबसे खूबसूरत स्थानों में से एक है। इसमें शानदार रंगीन कांच की खिड़कियाँ हैं जो सूरज की रोशनी में रंगीन पैटर्न बनाती हैं।
- फूल महल:- फूल महल किले की सबसे भव्य संरचना है। समृद्ध और सुसंपन्न सजावट इसे देखने लायक बनाती हैं। यह राठौड़ो की जीवन शैली को दर्शाता है।
- शीश महल:- शीश महल अपने जटिल दर्पण कार्य के लिए प्रसिद्ध है। महल की दीवारें और छतें हज़ारों छोटे छोटे दर्पणों से सजी हुई हैं जो रोशनी पड़ने पर एक चमकदार प्रभाव पैदा करती हैं। यह शानदार शिल्प कौशल राजपूतों की कलात्मक उत्कृष्टता को दर्शाता है।
- जानकी महल:- जहां राजपरिवार की महिलाऐं किले के प्रांगण में होने वाली कार्यवाही/गतिविधि पर नजर रखती थीं, यह महल अपनी जालीदार खिड़कियों के लिए जाना जाता है।
- कैसे पहुचे :-
यहाँ पहुचने के लिए सार्वजनिक परिवहन ( सिटी बस ) की सुविधा नहीं | आपको कैब, टैक्सी, ऑटो रिक्शा किराये पर करना होगा या आप स्वयं का वाहन लेकर भी आ सकते है | टैक्सी किराये पर करने से पहले आपको किराये को लेकर 2-4 टैक्सी वालो से पूछकर व मोल भाव करके सही दर तय करने के बाद यात्रा करनी चाहिए | यदि आप अकेले यात्री हो तो आप बाइक टैक्सी कर सकते है जो आपको सस्ता पड़ेगा | हालाँकि सभी वाहन किले के मुख्य द्वार तक जा सकते है परन्तु यदि गर्मी के दिन नहीं हो तो आप चलकर ही किले की चढ़ाई तय करें , यह 20-30 मिनट्स का रास्ता है और रास्ते में आप दूर से किले व आस पास के नज़ारे का आनंद ले पाएंगे परन्तु चढ़ाई के कारण गर्मियों के दिनों में चलना बेहद मुश्किल होता है |
समय :- 09AM से 05PM
टिकट :-
अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक - Rs.- 600
अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक ( विद्यार्थी ) - Rs. 400
भारतीय पर्यटक - Rs. 200
भारतीय पर्यटक ( विद्यार्थी / वरिष्ठ नागरिक ) - Rs. 100
लिफ्ट ( एक तरफ़ा ) - Rs. 50
जसवंत थड़ा
Lawaran near Mehrangarh Fort, Jodhpur 342001
जसवंत थड़ा एक शानदार छतरी है, जो नक्काशीदार सफेद संगमरमर से बनी एक सुंदर संरचना है। इसे जोधपुर राज्य के महाराजा सरदार सिंह ने 1899 में अपने पिता महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय की याद में बनवाया था और यह मारवाड़ के शाही राजपूत परिवार के लिए शमशान घाट के रूप में कार्य करता है। इस स्मारक को राजस्थान का ताजमहल कहा जाता है क्योंकि यह मंदिर जैसा दिखता है और इसके गुंबद इसे ताजमहल जैसा रूप देते है। यह स्मारक सुंदर उद्यानों और एक शांत झील से घिरा हुआ है। यहाँ 3 और छतरियां भी हैं।
समय:- 09:30 AM - 05:00 PM
टिकट:-
भारतीय आगंतुक- 30 रुपये
अंतर्राष्ट्रीय आगंतुक- 50 रुपये
उम्मेद भवन पैलेस
Cantt Area, Jodhpur 342006
उम्मेद भवन पैलेस का निर्माण 1928 से 1943 के बीच हुआ | इसका नाम वर्तमान महाराजा गजसिंह के दादाजी महाराजा उम्मेद सिंह के नाम पर रखा गया | इस महल में 347 कमरे हैं और यह पूर्व जोधपुर राजपरिवार का मुख्य निवास स्थान है। यह जोधपुर के सबसे ऊंचे स्थान छित्तर हिल पर स्थित है, इसलिए इसे छित्तर पैलेस भी कहा जाता है। यह हवाई अड्डे से 20 मिनट की दूरी पर स्थित है।
इस महल का निर्माण महाराजा उम्मेद सिंह ने अकाल राहत के लिए करवाया था क्योंकि उस समय भयंकर सूखा पड़ा था जिसके कारण किसानों की हालत दयनीय हो गई थी इसलिए महाराजा ने उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिए इस भव्य महल का निर्माण करवाया था। महल तीन भागों में विभाजित है। एक भाग शाही परिवार के निवास के लिए, दूसरा भाग होटल के लिए और तीसरा भाग संग्रहालय के लिए।
यहाँ आप पुरानी कारों का संग्रह देख सकते हैं जहाँ महँगी महँगी विंटेज कार को रखा गया है | महल के आम परिसर में प्रवेश करने और कार संग्रह को देखने के लिए कोई शुल्क नहीं है, लेकिन महल के अंदर स्थित संग्रहालय में प्रवेश के लिए आपको मुख्य प्रवेश द्वार पर टिकट काउंटर से टिकट खरीदना होगा।
समय :- 10:00AM से 04:30PM
टिकट :-
भारतीय पर्यटक - Rs.50
भारतीय विद्यार्थी - Rs.30
अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक - Rs.100
घंटाघर
Sardar Market, Jodhpur 342001
जोधपुर में घंटाघर शहर का एक खूबसूरत स्थल है। यह जोधपुर में सरदार बाजार में स्थित एक प्रसिद्ध स्मारक है, लेकिन यह क्षेत्र सरदार बाजार के बजाय घंटाघर के कारण अधिक प्रसिद्ध है। यह स्थल खरीदारी के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है। घंटाघर का निर्माण 1910 में महाराजा सरदार सिंह ने शुरू करवाया था और 1912 में यह बनकर तैयार हुआ। इसके चारों तरफ 25 - 25 दुकानें हैं जो किराए पर दी जाती हैं। इसे शहर में खरीददारी का हॉटस्पॉट माना जाता है | 98 फीट ऊंचे इस क्लॉक टॉवर में तीन मंजिलें हैं और तीसरी मंजिल पर 6 फीट की घड़ी लगी हुई है। आगंतुक टॉवर पर चढ़कर आस-पास के इलाके को देख सकते हैं परन्तु इसके लिए नाममात्र का शुल्क देकर टिकट लेनी होती है | आम तौर पर, शाम के समय जब यह चमकदार रोशनी से जगमगाता है, तो घंटाघर सबसे अच्छा दिखता है। यह बाजार आमतौर पर व्यस्त रहता है। यहां आप हस्तशिल्प, राजस्थानी परिधान, मसाले, स्थानीय भोजन, सब्जियाँ आदि बहुत कुछ खरीद सकते हैं।
समय - 10 AM – 6 PM (हालाँकि समय के पाबंद नहीं)
टिकट :- घंटाघर देखने का कोई शुल्क नहीं है |
मंडोर उद्यान
Mandore, Jodhpur, 342007
मंडोर गार्डन जोधपुर में घूमने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक है। कहा जाता है कि मंडोर गार्डन की स्थापना 6वीं शताब्दी में प्रतिहार वंश के शासकों द्वारा की गई थी। जोधपुर शहर की स्थापना से पहले यह मारवाड़ की राजधानी थी। अगर आपको समृद्ध सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत को देखने में रुचि है तो यह राजस्थान की सबसे अच्छी जगहों में से एक है। यह उद्यान अपने प्राचीन स्मारकों (छतरियों) के लिए प्रसिद्ध है, जो मारवाड़ के शाही शासकों की याद में बनाए गए हैं।
- विशेष आकर्षण:-
- ऐतिहासिक छतरियाँ :- मंडोर उद्यान का प्रमुख आकर्षण यहाँ की छतरियाँ है | . ये छतरियां मारवाड़ के शाही शासको को समर्पित है |
- प्राचीन मंदिर:- मंडोर उद्यान में भगवान शिव और भगवान विष्णु को समर्पित कई प्राचीन मंदिर हैं। ये मंदिर शानदार नक्काशी और शांतिपूर्ण वातावरण के लिए लोकप्रिय हैं।
- रानी का महल:- यह राजपूतों की शानदार वास्तुकला का एक उदाहरण है। इसका नाम रानी का महल इसलिए रखा गया क्योंकि कभी यह मारवाड़ की रानियों के रहने का स्थान हुआ करता था।
- मनोरंजन गतिविधियाँ :- यहां कुछ क्षेत्र बने हैं जहां मनोरंजन व एडवेंचर गतिविधियां होती हैं जो बच्चो को ज्यादा पसंद आती है | यहां कुछ टिकट शुल्क देकर प्रवेश लिया जा सकता है।
- सार्वजनिक संग्रहालय :- इस संग्रहालय में प्राचीन वस्तुओं का बहुत बड़ा संग्रह है। जब आप इस संग्रहालय में जाएँगे तो आपको अतीत के बारे में अधिक ज्ञान और जानकारी मिलेगी।
वहां जाने से पहले ध्यान रखें कि संग्रहालय शुक्रवार को छोड़कर सप्ताह के सभी दिन खुला रहता है | - काला गोरा भेरुजी मंदिर:- यहां कई भक्त दर्शन के लिए आते हैं और यह मंदिर मंडोर उद्यान में ही सरकारी संग्रहालय के सामने स्थित है।
- टॉय ट्रेन:- प्रवेश द्वार पर आपको एक टॉय ट्रेन खड़ी मिलेगी, आप 10 रुपये का टिकट लेकर उसमें सवार हो सकते हैं। यह ट्रेन मंडोर गार्डन का चक्कर लगाकर पुन: प्रवेश द्वार पर आती है।
- फाउंटेन
- बैठने का अच्छा स्थान
- चौपाटी (खाने पीने हेतु)
- ज़िप लाइन व नौकायान (RTDC द्वारा संचालित)
समय :- 8 AM – 6 PM
टिकट :- कोई प्रवेश शुल्क नहीं
राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क
Mehrangh fort road, Jodhpur 342006
राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क मेहरानगढ़ किले के तलहटी पर स्थित हैं| इस पार्क का नाम जोधपुर के संस्थापक राव जोधा के नाम पर रखा गया हैं | यह पार्क 72 हेक्टेयर में फैला हुआ है | राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क 2006 में मेहरानगढ़ किले के आसपास प्राकृतिक पारिस्थितिकी को बहाल करने के लिए बनाया गया | यह पार्क फरवरी 2011 में जनता के लिए खोल दिया गया था।
अगर आपको ट्रैकिंग करना पसंद है तो जोधपुर में यह एक बेहतरीन जगह है जहां आप प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकते हैं। प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफरों और पर्यावरण में रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति को इस पार्क का दौरा अवश्य करना चाहिए। यहां आप विभिन्न पक्षियों और पौधों को देख सकते हैं।
यहाँ चार पैदल मार्ग (पीला, हरा, लाल और नीला) हैं | इन मार्गो से आगंतुक पार्क का भ्रमण करने और स्थानीय पारिस्थितिकी के बारे में जानने के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते हैं |
इस पार्क का अच्छा अनुभव लेने के लिए प्रातः समय सबसे खुबसूरत होता है जब आपको उगते सूरज की किरणें शहर पर गिरती हुयी दिखती हैं तो ऊपर से नज़ारा और भी सुन्दर दिखता है | पार्क के अंदर और इसके आसपास के क्षेत्र में विशिष्ट ज्वालामुखीय चट्टान और बलुआ पत्थर की संरचनाएँ हैं। पार्क में एक विजिटर सेंटर है जिसमें एक देशी पौधो की नर्सरी, एक छोटी दुकान, प्रदर्शनी और कैफे शामिल है |
राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क का दौरा करने से प्राकृतिक वातावरण को और राजस्थान के विशेष मरुस्थल की पारिस्थितिकी तंत्र को अधिक जानने का मौका मिलता है।
प्रवेश शुल्क :-
व्यस्क : Rs. 100
गाइड के साथ : Rs. 200
पार्क समय :- 8:00AM – 05:30 PM
माचिया सफारी पार्क
Kailana Rd, Pratap Nagar, Jodhpur 342003
माचिया सफारी पार्क जोधपुर से 8 किलोमीटर पश्चिम में कायलाना झील के पास स्थित है। इस सफारी पार्क की योजना 1983 में बनाई गई थी। माचिया सफारी पार्क में कई जंगली जानवर जैसे हिरण, मरू लोमड़ी, मॉनिटर छिपकली, नीलगाय, खरगोश, जंगली बिल्लियाँ, नेवला, बंदर आदि पाए जाते हैं।
इस सफारी पार्क में ऐसे कई स्थान हैं जहाँ से आप इन जानवरों को देख सकते हैं और वो भी उनकी निजता में दखल दिए बिना | जानवरों को अक्सर उनके आवास में आनंद लेते हुए देखा जा सकता है। प्रकृति और शांति पसंद करने वाले पर्यटकों के लिए यह एक अच्छी जगह है।
समय:- 8.30 AM to 5 PM, (मंगलवार को बंद )
टिकट : -
Rs. 30 - भारतीय पर्यटक
Rs. 80 - कैमरा
Rs. 200 - विडियो कैमरा
Rs. 300 - अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक
तूर जी का झालरा
Makrana Mohalla, Sutharo Ka Baas Rd, Gulab Sagar, Jodhpur 342001
तूरजी का झालरा को जोधपुर की बावड़ी के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण 1740 में किया गया था। इस बावड़ी का निर्माण पानी इकट्ठा करने और संग्रहीत करने के लिए किया गया था, इस बावड़ी की डिज़ाइन अद्भुत है जो जोधपुर की कुछ बेहतरीन जल संचय प्रणाली की श्रेष्ठ संरचनाओं को दिखाती है |
इतिहास के अनुसार जोधपुर के महाराजा अभय सिंह की तंवर रानी (तूर रानी) ने वर्ष 1740 में झालरा का निर्माण करवाया था, जिसके कारण इसका नाम तूरजी का झालरा पड़ा। इस वास्तुकला का निर्माण जोधपुर में पाए जाने वाले प्रसिद्ध गुलाबी-लाल बलुआ पत्थर से किया गया था। तूरजी का झालरा सबसे खूबसूरत बावड़ियों में से एक है जिसमें कई चबूतरे, सीढ़ियाँ है और बीच में एक विशाल कुंड है।
समय : - 6AM & 6PM ( समय भिन्न हो सकता है )
टिकट :- यहाँ प्रवेश के लिए किसी प्रकार का शुल्क देय नहीं है |
बालसमंद झील
Mandore Rd, Balsamand, Jodhpur 342024
यदि आप जोधपुर में हो तो आपको बालसमंद झील की शांत सुंदरता का अनुभव अवश्य करना चाहिए | यह झील जोधपुर शहर से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
यह प्राचीन कृत्रिम झील 1159 ई. में बालक राव द्वारा बनवाई गयी थी जो जोधपुर-मंडोर रोड पर स्थित है | इस झील पर आसानी से पहुचा जा सकता है। इस जगह पर सुव्यवस्थित बगीचे है जिनमें आम, अमरूद, बेर और अनार जैसे विभिन्न फलों के पेड़-पौधे और विभिन्न पक्षियों और जानवरों के दृश्य इस जगह को बहुत आकर्षक बनाते है। यह झील बहुत बड़ी है और शुष्क बिखरे हुए पहाड़ो से घिरी हुई है |
समय:- 06:00 AM - 08:00 PM
टिकट:- निःशुल्क
समय :- 8AM- 8PM
टिकट :- मंडोर उद्यान देखने के लिए कोई टिकट की आवश्यकता नहीं है |
महामंदिर
Mandore Road, Jodhpur, Rajasthan, 342001
जोधपुर की ऐतिहासिक धरोहरों में, महामंदिर मंदिर एक वास्तुशिल्प रत्न है, जो भक्ति, कलात्मकता और राजकीय संरक्षण की कहानियां बयां करता है | महामंदिर का निर्माण 1805 में जोधपुर के राजा मानसिंह द्वारा कराया गया था। यह केवल पूजा का स्थान नहीं था, बल्कि इससे अधिक था। इसका निर्माण 9 अप्रैल 1804 को शुरू हुआ और 4 फरवरी 1805 को पूरा हुआ, जिसकी लागत उस समय 40 लाख रुपये थी, जो उस युग में एक बहुत बड़ी राशि थी। राजा मान सिंह ने इस भव्य मंदिर का निर्माण अपने गुरु जलंधरनाथ जी के शिष्य अयास नाथ जी के सम्मान में किया था। 18 वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर नाथ समुदाय के पूजनीय जलंधरनाथ जी को समर्पित है |
मंदिर की वास्तुकला का वैभव इसके विशाल चतुर्भुज विस्तार में परिलक्षित होता है। चार विशाल प्रवेश द्वार इसके कोनों पर स्थित हैं, जो श्रद्धा के साथ साथ आश्चर्य पैदा करते है | इसके परिसर में संगमरमर की मेहराबें, जिनमें उत्कृष्ट गरुड़ मूर्तियाँ हैं, जो इसकी शोभा बढ़ाती हैं। वर्तमान में महामंदिर परिसर के एक हिस्से में एक सरकारी स्कूल संचालित होता है, जो इसके आधुनिक जीवन में एकीकरण को दर्शाता है।
जोधपुर शहर से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित महामंदिर मंदिर, पर्यटकों के लिए पहुचने में आसान है, इसकी विशालता और भव्यता इसके नाम को बिल्कुल सही ठहराते है, जो यहां आने वाले सभी लोगों को एक शानदार अनुभव प्रदान करता है।
समय :-
सुबह:- 5AM- 12PM
शाम :- 4PM - 9PM
टिकट :- यहाँ प्रवेश के लिए किसी प्रकार का शुल्क देय नहीं है |
कायलाना झील
Near Pratap Nagar, Jodhpur 342001
कायलाना झील जोधपुर के पश्चिम में 8 किलोमीटर दूर स्थित एक कृत्रिम झील है जिसका निर्माण सर प्रताप सिंह द्वारा करवाया गया | मारवाड़ की जलवायु शुष्क है इसलिए इस क्षेत्र में सूखे की समस्या आम होती थी , इस समस्या के समाधान हेतु महाराजा सर प्रताप सिंह ने एक बड़े जल स्रोत को विकास करने का निर्णय लिया | इस झील का निर्माण कार्य सन् 1892 से शुरू हुआ, यह झील वर्तमान में जोधपुर शहर के पानी की जरूरतों को पूरा करती है | यह झील वर्षो तक सूनी ही रही जहाँ लोगो का आवागमन इतना नहीं होता था तो यहाँ जाना भी सुरक्षित नहीं था परन्तु पिछले 10 वर्षो से यहाँ पर कई महत्वपूर्ण विकास कार्य पूर्ण हुए है तथा वर्तमान में भी यहाँ विकास कार्य शुरू ही है | यदि आप शहर के शोर से दूर जाकर शांतिपूर्ण जगह समय व्यतीत करना चाहते हो तो यह जगह बिल्कुल आपके लिए बेहतरीन होगी |
इन दिनों यह जगह कभी कभी व्यस्त रहती है , यहाँ पर आपको निम्न आकर्षण केंद्र / सुविधाएँ मिलेगी :-

























































